दशहरा का पर्व पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। दशहरा का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने लंकापति रावण का वध किया था. रावण के बढ़ते अत्याचार और अंहकार के कारण भगवान विष्णु ने राम के रूप में अवतार लिया और रावण का वध कर पृथ्वी को रावण के अत्याचारों से मुक्त कराया. रावण पर विजय प्राप्त करने के उपलक्ष्य में दशहरा का पर्व मनाया जाता है इस पर्व को विजय दशमी भी कहा जाता है. इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार भी किया था।

दशहरा पूजा का महत्व
दशहरा के दिन मां दुर्गा और भगवान राम की पूजा की जाती है. मां दुर्गा जहां शक्ति की प्रतीक हैं वहीं भगवान राम मर्यादा, धर्म और आदर्श व्यक्तित्व के प्रतीक हैं. जीवन में शक्ति, मर्यादा, धर्म और आदर्श का विशेष महत्व है. जिस व्यक्ति के भीतर ये गुण हैं वह सफलता को प्राप्त करता है.

कब है दशहरा
पचांग के अनुसार इस वर्ष दशहरा का पर्व .5 अक्टूबर …. को मनाया जाएगा. इस दिन सूर्य तुला राशि और चंद्रमा मकर राशि में होगा. इस दिन धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा. दशहरा का पर्व दीवाली से ठीक .. दिन पहले आता है।इस बार आठ दिनों में ही बीत जाएंगे ।
इस बार नवरात्र आठ दिन के होंगे. अष्टमी और नवमी तिथियों को दुर्गापूजा एक ही दिन होगी. .4 अक्तूबर को सवेरे छह बजकर 58 मिनट तक अष्टमी है और उसके बाद नवमी लग जाएगी.

विजय मुहूर्त- ..:55 से .4:4.
अपराह्न पूजा समय- ..:.. से .5:.4
दशमी तिथि आरंभ- .7:4. (.5 अक्तूबर)
दशमी तिथि समाप्त- .8:59 (.6 अक्तूबर)

दशहरा (.5 अक्तूबर …. को)

विजय मुहूर्त- .4:.. से .4:45

अपराह्न पूजा समय- ..:.4 से .5:..

दशमी तिथि आरंभ- .8:5. (.4 अक्तूबर)

दशमी तिथि समाप्त- .8:.. (.5 अक्तूबर)

अधिक मास का प्रभाव

इस वर्ष पितृपक्ष के बाद अधिकमास यानि पुरुषोत्तम मास लग जाने के कारण नवरात्रि और दशहरा का पर्व एक महीने देर से आ रहे हैं. अधिक मास का समापन .6 अक्टूबर …. को होगा. .7 अक्टूबर से नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है और .4 अक्टूबर …. को रामनवी के अगले ही दिन यानि .5 अक्टूबर …. को विजय दशमी का पर्व मनाया जाएगा. दशहरा के ठीक .. दिन बाद यानि .4 नवंबर …. को दीवाली का पर्व मनाया जाएगा.

दशहरा पूजा मुहूर्त

पंचांग के अनुसार इस दिन यानि .5 अक्टूबर को 7 बजकर 4. मिनट से .6 अक्टूबर को 8 बजकर 59 मिनट तक दशमी की तिथि रहेगी. इस बीच .. बजकर 55 मिनट से .. बजकर 4. तक विजय मुहूर्त रहेगा. अपराह्न पूजा का समय .. बजकर .. मिनट से .. बजकर .4 मिनट तक बना हुआ है।
दशहरा हिंदूओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है, प्रभु श्रीराम के हाथों रावण का वध होने के बाद से ही इसे मनाने की परंपरा चली आ रही है.

जानें इसका शुभ मुहूर्त

नवरात्री आने में मात्र कुछ ही दिन बचे हैं, इस बार .7 अक्टूबर को नवरात्रि शुरु हो रही हैं वहीं विजया दशमी का पर्व .5 अक्टूबर के दिन मनाया जाएगा. दशहरा के दिन प्रभु श्रीराम ने रावण का वध किया था, इसके साथ ही ये भी मान्यता है कि इसी दिन मां दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध किया था. मान्यता है कि इस दिन जो भी काम किया जाता है, उसका शुभ लाभ अवश्य प्राप्त होता है।

शुभ मुहूर्त दशमी तिथि प्रारंभ

    • .5 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 4. मिनट से विजय मुहूर्त
    • दोपहर .. बजकर 55 मिनट से .. बजकर 4. तक

अपराह्न पूजा मुहूर्त

    • .. बजकर .. मिनट से .. बजकर .4 मिनट तक

दशमी तिथि समाप्त

    • .6 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 59 मिनट तक रहेगी

दशहरा को बुराई पर अच्छाई की जात पर सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है. नवरात्रि दशहरा हिन्दू धर्म का प्रमुख त्योहार है. इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत और असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता. हर साल यह पर्व आश्विन मास शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन मनाया जाता है. पूरे देश में विजयादशी के दिन रावण के पुतले को फूंकने की परंपरा है. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर इस साल कब मनाया जाएगा दशहरा और क्या है शुभ मुर्हूत।

इस बार नवरात्र आठ दिन के होंगे, अष्टमी और नवमी तिथियों को दुर्गापूजा एक ही दिन होगी. .4 अक्तूबर को सवेरे छह बजकर 58 मिनट तक अष्टमी है और उसके बाद नवमी लग जाएगी.

वर्ष …. में कब है विजय दशमी??
.5 अक्टूबर …., रविवार को मनाई जाएगा. इस साल मलमास (अधिकमास) लगने की वजह से नवरात्रि और दशहरा पर्व एक महीने की देरी से शुरु हो रहे हैं. इस बार नवरात्रि .7 अक्टूबर से शुरु हो रहे हैं और .4 अक्टूबर को रामनवमी है इसक अगले दिन है विजय दशमी होगी.

जानिए क्यों होती हैं दशहरे के दिन होती है शस्त्र पूजा

इस दिन महिषासुर मर्दिनी मां दुर्गा और भगवान राम की पूजा करनी चाहिए. इससे सम्पूर्ण बाधाओं का नाश होगा और जीवन में विजय श्री प्राप्त होगी. इस दिन अस्त्र-शस्त्र की पूजा करना बड़ा फायदेमंद होता है. दशहरे के दिन शस्त्रों की पूजा होता है, इस दिन सनातन परंपरा में शस्त्र और शास्त्रा दोनों का खास महत्व है. शास्त्र की रक्षा और आत्मरक्षा के लिए धर्मसम्म्त तरीके से शस्त्र का प्रयोग होता है.

पूजन का शुभ मुहूर्त

दशमी तिथि प्रारंभ – .5 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 4. मिनट से

विजय मुहूर्त – दोपहर .. बजकर 55 मिनट से .. बजकर 4. तक

अपराह्न पूजा मुहूर्त – .. बजकर .. मिनट से .. बजकर .4 मिनट तक

दशमी तिथि समाप्त – .6 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 59 मिनट तक रहेगी

दशहरा / विजया दशमी मुहूर्त के शास्रोक्त तथ्य

ऐसे समझें दशहरे में बदलाव…
पंडित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार इस साल यानि वर्ष …. में दशमी .6 अक्टूबर की मनाई जाएगी, जबकि दशहरा .5 अक्टबूर, रविवार को पड़ रहा है, इसका कारण यह हैं कि…

  • दशहरा पर्व अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को अपराह्न काल में मनाया जाता है। इस काल की अवधि सूर्योदय के बाद दसवें मुहूर्त से लेकर बारहवें मुहूर्त तक की होती।
  • यदि दशमी दो दिन के अपराह्न काल में हो तो दशहरा त्यौहार पहले दिन मनाया जाएगा।
  • यदि दशमी दोनों दिन पड़ रही है, परंतु अपराह्न काल में नहीं, उस समय में भी यह पर्व पहले दिन ही मनाया जाएगा।
  • यदि दशमी दो दिन हो और केवल दूसरे ही दिन अपराह्नकाल को व्याप्त करे तो विजयादशमी दूसरे दिन मनाई जाएगी।
  • इसके अलावा श्रवण नक्षत्र भी दशहरा के मुहूर्त को प्रभावित करता है।
  • यदि दशमी तिथि दो दिन पड़ती है (चाहे अपराह्ण काल में हो या ना) लेकिन, श्रवण नक्षत्र पहले दिन के अपराह्न काल में पड़े तो विजयदशमी का त्यौहार प्रथम दिन में मनाया जाएगा।
  • यदि दशमी तिथि दो दिन पड़ती है (चाहे अपराह्न काल में हो या ना) लेकिन श्रवण नक्षत्र दूसरे दिन के अपराह्न काल में पड़े तो विजयादशमी का त्यौहार दूसरे दिन मनाया जाएगा।
  • यदि दशमी तिथि दोनों दिन पड़े, लेकिन अपराह्ण काल केवल पहले दिन हो तो उस स्थिति में दूसरे दिन दशमी तिथि पहले तीन मुहूर्त तक विद्यमान रहेगी और श्रवण नक्षत्र दूसरे दिन के अपराह्न काल में व्याप्त होगा तो दशहरा पर्व दूसरे दिन मनाया जाएगा।
  • यदि दशमी तिथि पहले दिन के अपराह्न काल में हो और दूसरे दिन तीन मुहूर्त से कम हो तो उस स्थिति में विजयादशी त्यौहार पहले दिन ही मनाया जाएगा। इसमें फिर श्रवण नक्षत्र की किसी भी परिस्थिति को ख़ारिज कर दिया जाएगा।
  • ऐसे में इस बार जहां .5 अक्टूबर को नवमी सुबह 7.4. तक ही रहेगी, वहीं इसके बाद दशमी शुरु हो जाएगी। जबकि यह दशमी तिथि .6 अक्टूबर को सुबह 9 बजे तक ही रहेगी। जिसके चलते दशहरा …. यानि विजयदशमी …., .5 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा। जबकि दुर्गा विसर्जन .6 अक्टूबर को होगा।

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